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कथा एक आत्महत्या की-KAMAL KISHORE KAFIR

अपडेट करने की तारीख: 5 मई 2023

सुबह के सूरज की किरणे जब उसके मुख पर पड़ी तो वोह झुझलाकर उठ बैठा और क्रोध भरी दृष्टि से सूरज को यू देखने लगा जैसे की भगवान् ने सूरज को उसे कष्ट देने के लिए बनाया हो . वो जिसका परिचय ये था की वो एक पड़ा लिखा बेरोजगार था वो छत पैर सोया था उसकी दशा भी भारत के हर बेरोजगार के तरह थी जो हर राज्य , हर शहर, हर गाँव मे पाए जाते है. जिनका सम्मान आवारा , बेकार, लाचार, नासमझ ,आदि शब्दों से किया जाता है. बेरोजगार को यदि भगवान् रोज़गार नहीं दे सकता तो कम से कम ऐसा पत्थर दिल दे जो बाण से नुकीले और कटार की धार जैसे तेज़ तानो और आघातों को सह सके. ऐसा ही नुकीला ताना उसके कानो मे पड़ा क्यूँकि वो सुबह गहरी निद्रा मे सो रहा था क्यूंकि बेरोजगारों को नींद सुबह ही आती है उनकी रात तो ख़्वाबो मे कट जाती है . ये ताना कोई और नहीं उसके पापा की जुबान से था ताने के शब्द इस तरह से थे “ होश मे कब आएगा या जिंदगी भर सोता ही रहेगा “ पापा ने कहा उठ ग्रोवर आंटी के पति से बात की है एक जॉब बताई है फील्ड वर्कर की फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर के पास , उठ और जाके एड्रेस ले ले ग्रोवर आंटी से. वोह बेरोजगार जो की शारीरिक रूप से खोखला हो गया था घर पर रह कर. बड़ा भाई अलग चला गया था शादी के बाद ,पापा कैंटीन मे काम करते थे घर अपना था बस यही सकारत्मक था. अब वो पंहुचा उस फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर के पास , फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर- क्या क्वालिफिकेशनस् है , बेरोजगार जी मे ग्रेजुएट हूँ , फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर ये जॉब चपरासी / फील्ड वर्कर की है , सुबह आकर ऑफिस साफ़ करना और यहाँ पानी नहीं आता नीचे से २ बाल्टी पानी लाना उसके बाद एक बोतल बिसलेरी की नीचे से लाना बाद मे फील्ड मे जाकर डाक्यूमेंट्स और चेक लाना . कर पाओंगे तो बताओ , बेरोजगार- सर कर लूँगा . फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर –ठीक कल सुबह आठ बजे से आ जाओ , बेरोजगार –सर आठ बजे, फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर –हाँ आठ बजे ,बताया न पानी नहीं आता है यहाँ, आते ही पानी भर लेना , बेरोजगार ठीक है . वो वापिस घर को आते वक़्त सोचने लगा शरीर तो मेरा खोखला हो गया है चाय पी पी कर भूख मारने के लिए , नीचे से तीसरी मंजिल पैर पानी कैसे ले जाऊँगा ये कोई जॉब है ग्रेजुएट बन्दे के लिए. पर क्या करूंगा घर पर कर लेता हूँ. वो अगले दिन पंहुचा और गार्ड से चाबी ली और ऑफिस खोला , फिर पानी भरने के लिए बाल्टी ले कर नीचे चला गया . बाल्टी ले के ऊपर आया तो पसीने पसीने हो गया साँस फूल गई फिर दूसरी बाल्टी ले कर नीचे गया अब ऊपर आ रहा थो बाल्टी मे पैर उलझ गया और सीडियो से नीचे गिरा और बेहोश हो गया सीधा होसीपिटल पहुंचा. माँ और पिताजी भी सुनकर पहुच गए. पिता ने पूछा क्या हुआ डॉक्टर से , डॉक्टर कमजोर है आपका बेटा इसलिए नर्वस हो गया था और बेहोश हो गया इसकी कमर के हड्डी टूट गई है बेड रेस्ट करना होगा ३ महीने के लिए, तभी बेरोजगार को होश आया , पिता –ढंग से काम नहीं कर सकता था ‘ पहले भी तो बोझ था अब तो और भारी बोझ हो गया है मेरे मरने तक तू सुधेरेगा नहीं , मे कहा तक तुम्हारा बोझ उठाऊ.” बेरोजगार –पापा मे पानी ला रहा था पैर बाल्टी से उलझ गया क्या करू, मर जाता तो अच्छा था सच मे बोझ हो गई है जिंदगी. खैर अब वो घर मे था तभी उसके फूफा आये बोले सब ठीक हो जायेगा मैंने तेरे लिए एक जॉब देखि है लाटरी की दुकान पर लाटरी बेचनी है और क्या अच्छी कमाई है कमीशन भी है. तू चिंता मत कर सब ठीक हो जायेगा . अब वोह बेरोजगार खुश था . तीन महीने तीन सदियो के तरह कटे और वो ठीक हो गया . अब उसके पूफा ने उसे लाटरी की दुकान पर लगा दिया वह उसे रोज़ के ५०० रूपए मिलते थे जीवन आसान हो गया. ख़ुशी लौट आई उसने घर मे पैसे देने शुरु किये तो घरवालो के भी चेहरे खिल गए , माँ खुश पिताजी खुश सब खुश. जीवन चलने लगा . कुछ दिन बीतने के बाद एक दबंग टाइप बंदा उसकी दूकान पे आता था उसने इस बेरोजगार से कहा कब तक नौकरी करता रहेगा , लाटरी बंद भी हो सकती है तू भी कोई दाव लगाले की पता किस्मत चमक ही जाए . उसने सोचा और कहा- कहते तो सही हो उसने अपने जब के १००० रुपयी का दाव लगा दिया और दाव लग गया , उसको मिले पूरे रुपये ११००० वोह ख़ुशी ख़ुशी घर गया और सोचा १०००० माँ को दे देता हूँ बाकी का दाव फिर लगाऊँगा और उसने ऐसा ही किया . फिर कुछ दिन बाद उसे वो ही दबंग बंदा मिला बोला छोटे छोटे दाव से क्या होगा एक बड़ा दाव लगा और अमीर हो जा इस बेरोजगार ने कहा मेरे पास इतने पैसे नहीं है तब दबंग बोला ऐसा कर मुझे से उधार ले ले ब्याज पर बस हर महीने ब्याज देता रहीयो यही से उसकी कर्ज़े के शुरआत हुई और वो लाटरी के दलदल मे फस गया अब उस पर कर्जा हो गया था १०००००/- और अचानक लाटरी बंद कर दी गवर्मेंट ने . अब उसे दबंग ने कहा मुझे पैसा वापिस चाहिए ब्याज के साथ उसने कुछ समय माँगा पर इतना पैसा कहा से लाता , कई बार वो दबंग को गोली देता रहा कि कल दूंगा, परसों दूंगा. पर वो क़र्ज़ लोटा न सका . एक दिन दबंग अपने आदमियों के साथ उसके घर पहुच गया ये बाहर से आया तो आते ही माँ चीखी कमीने तूने इतना क़र्ज़ क्यों लिया , क्या किया बता . अब उसने सोचा की थोड़ी देर मे पिताजी आ जायेंगे , वो तो शर्म से मर जायेंगे. बेरोजगार ने एक चाल चली और रसोई मे बंद हो गया उसने सोचा की मे रसोई के दरवाज़े पर मिटटी का तेल डालकर आग लगा दूंगा और ये लोग डर जायेंगे और शायद मेरा क़र्ज़ माफ़ कर दे . उनसे दरवाज़े पर मिटटी का तेल छिड़का और चीखा मे मर रहा हूँ तुम लोगो ने मुझे बर्बाद किया लाटरी की आदत डाली और कर्जा दिया मे तुम लोगो को फंसा दूंगा की मेरी मौत के जिम्मेवार तुम लोग हो , इतने माँ और वो दबंग आदमी बोले बाहर आजा नाटक मत कर और पैसो का हिसाब किताब कर ले , अपनी माँ के आगे बता के आखिर कब देगा पैसे. बेरोजगार ने कहा तुम ऐसे नहीं मानोगे उसने माचिस से दरवाज़े पर आग लगा दी पर वो वो भूल गया की सिलिंडर भी वही है और एक जोरदार धमाका सब खत्म. सब सत्ब्थ रहे गए .अगले दिन उसकी अर्थी जा रही थी और सूरज उसके मुख पर पड़ रहा था पर आज वो सूरज से कह रहा था कि तुम हार गए और मे जीत गया तुम मुझे आज नहीं जगा सकते.


मोरल:-

अगर हमने अपने दिलो मे दया की हत्या न की होती तो शायद लोग आतमहत्या न करते.



कथा एक आत्महत्या की , DEPRESSION SUCIDE STORY
कथा एक आत्महत्या की

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